ganesh chaturthi 2018 - wikifeed
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गणेश चतुर्थी 13 सितम्बर 2018 गुरुवार से प्रारम्भ होकर 23 सितम्बर 2018 रविवार को गणपति विसर्जन के साथ समाप्त होगा।

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मेरे प्रिय सिशियो और साधको और आजके मेरे नविन प्रेय दर्शको “गणपति बाबा मोरया”यह शब्द एक साल में 10 दिनों के लिए आता हे ,हमारे दिल दिमाग परिवार और आस पड़ोस में ये मानलो या फेर ये कहें की पुरे ब्रह्माण्ड में गूंजे जाते हे। इस वर्ष बृहस्पतिवार 13 September 2018 (गणेश तान्त्र मोहत्सव) बड़े ही धूम धाम से मनाया जाता है.

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13 सितंबर को गणेश चतुर्थी है। इसी तिथि पर सभी देवी-देवताओं में सबसे पहले पूजे जाने वाले भगवान गणेश का जन्म हुआ था। भाद्रपद मास के शुक्लपक्ष की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। भगवान गणेश का जन्म चतुर्थी को मध्याह्न काल में हुआ था। इसलिए मध्याह्न काल में ही भगवान गणेश की पूजा और प्रतिमा की स्थापना की जाती है इस समय को बेहद शुभ समय माना गया है।

गणपति की विधिवत स्थापना और पूजा-अर्चना करने से ही सारे दुखों का हरण और जीवन मंगलमय होता है। गणेशोत्सव का प्रसिद्ध महापर्व इस साल श्री गणेश चतुर्थी 13 सितम्बर 2018 गुरुवार से प्रारम्भ होकर 23 सितम्बर 2018 रविवार को गणपति विसर्जन के साथ समाप्त होगा।
गणेश चतुर्थी शुभ मुहूर्त:
बुधवार को भगवान गणेश का दिन माना जाता है इसलिए बाजार से गणेश जी मूर्ति को घर पर लाना शुभ रहेगा।
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चतुर्थी तिथि प्रारम्भ:  12 सितंबर दिन बुधवार को शाम 4:07 से

चतुर्थी तिथि समाप्त: 13 सितंबर दिन गुरूवार को दोपहर 2:51 बजे तक

गणेश पूजन मुहूर्त:  13 सितंबर दिन गुरूवार को सुबह 11:02 से 13:31 तक

गणेश जी की मूर्ति लाने का मुहूर्त: 12 सितम्बर को मध्याह्न 3:30 से सांयकाल 6:30 तक

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संकट हर लेंगे गणपति

भगवान गणपति मंगलकर्ता हैं। विघ्न विनाशक हैं। कल्याणकर्ता हैं। जो कोई उनकी शरण में जाता है, उसका वह कल्याण करते हैं। एक बार देवर्षि नारद जी भी संकट में फंस गए। वह इधर-उधर घूमे लेकिन संकट का समाधान नहीं हुआ। तब शंकर जी के कहने पर उन्होंने संकटनाशन स्तोत्र की रचना की। इस स्तोत्र का स्तवन करने वाला कभी संकट में नहीं रहता। उसका समाधान हो जाता है। गणेश चतुर्थी के दिन इस स्तोत्र का यथासंभव पांच बार पाठ करें। ऋद्धि-सिद्धि आपके घर होंगी। किसी भी प्रकार का संकट हो, गौरीपुत्र आपकी मनोकामना को पूरी करेंगे।

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संकटनाशन स्तोत्र – (नारद पुराण)

प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम्
भक्तावासं स्मरेनित्यम आयुष्कामार्थ सिध्दये ॥१॥

प्रथमं वक्रतुण्डं च एकदन्तं द्वितीयकम्
तृतीयं कृष्णपिङगाक्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम ॥२॥

लम्बोदरं पञ्चमं च षष्ठं विकटमेव च
सप्तमं विघ्नराजेन्द्रं धुम्रवर्णं तथाषष्टम ॥३॥

नवमं भालचंद्रं च दशमं तु विनायकम्
एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजाननम ॥४॥

द्वादशेतानि नामानि त्रिसंध्यं य: पठेन्नर:
न च विघ्नभयं तस्य सर्वसिध्दीकर प्रभो ॥५॥

विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम्
पुत्रार्थी लभते पुत्रान्मोक्षार्थी लभते गतिम ॥६॥

जपेद्गणपतिस्तोत्रं षडभिर्मासे फलं लभेत्
संवत्सरेण सिध्दीं च लभते नात्र संशय: ॥७॥

अष्टभ्यो ब्राह्मणेभ्यश्च लिखित्वा य: समर्पयेत
तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादत: ॥८

गणेश चतुर्थी स्पेशल – सुबह सुबह गणेशजी का ध्यान करके इस आरती को सुने आप के सभी कार्य पूर्ण होंगे

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