Mother Teresa 109th Birth Anniversary - wikifeed
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Mother Teresa 109th Birth Anniversary : लोगों को समर्पित था उनका पूरा जीवन… जानें से जुड़ी कुछ खास बातें

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Mother Teresa 109th Birth Anniversary 2019 Celebrations भारत रत्न मदर टेरेसा की जयंती आज, जानें मानवता की प्रतिमूर्ति से जुड़ी कुछ खास बातें

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शां‍ति की दूत और मानवता की प्रतिमूर्ति मदर टेरेसा की आज 109वीं जयंती है. आज दुनिया में शायद ही कोई ऐसा हो जो मदर टेरेसा को न जानता हो. उनका जन्म 26 अगस्त, 1910 को मेसिडोनिया की राजधानी स्कोप्जे शहर में अल्बेनियाई परिवार में हुआ था. मदर टेरेसा आज भी अपनी ‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी’ संस्था के रूप में लोगों के बीच जीवंत मानी जाती हैं. आज पूरा देश ही नहीं बल्कि दुनिया मदर टेरेसा की 109वीं जयंती मनाकर उन्हें याद कर रही है. उनका वास्तविक नाम अगनेस गोंझा बोयाजिजू था.

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उन्होंने भारत के दीन-दुखियों की सेवा की है, कुष्ठ रोगियों और अनाथों की सेवा करने में अपनी पूरी जिंदगी लगा दी. उनकी इन्हीं काम के चलते नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है. दुनिया के अलग-अलग देशों की नागरिकता रखने वाली और मिशनरीज ऑफ चैरिटी की संस्थापक मदर टेरेसा ने अपनी पूरा जिंदगी दूसरों की सेवा में समर्पित कर दी. आज जानते हैं मदर टेरेसा के बारे में कुछ दिलचस्प बातें…

आइए जानते हैं उनके बारे में कुछ खास बातें…

1 मदर टेरेसा कैथोलिक थीं, लेकिन उन्हें भारत की नागरिकता मिली हुई थी. उन्हें भारत के साथ साथ कई अन्य देशों की नागरिकता मिली हुई थी, जिसमें ऑटोमन, सर्बिया, बुल्गेरिया और युगोस्लाविया शामिल हैं.

2 साल 1946 में उन्होंने गरीबों, असहायों की सेवा का संकल्प लिया था. निस्वार्थ सेवा के लिए टेरेसा ने 1950 में कोलकाता में ‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी’ की स्थापना की थी. 1981 में उन्होंने अपना नाम बदल लिया था.

3 अल्बानिया मूल की मदर टेरेसा ने कोलकाता में गरीबों और पीड़ित लोगों के लिए जो किया वो दुनिया में अभूतपूर्व माना जाता है.

4 उन्होंने 12 सदस्यों के साथ अपनी संस्था की शुरुआत की थी और अब यह संस्था 133 देशों में काम कर रही है. 133 देशों में इनकी 4501 सिस्टर हैं.

5 मदर टेरेसा को उनके जीवनकाल में गरीबों और वंचितों की सेवा और उत्थान के लिए कई पुरस्कार मिले. इसमें 1979 में मिला नोबेल शांति पुरस्कार सबसे प्रमुख था, जो उन्हें मानवता की सेवा के लिए प्रदान किया गया था.

6 वेटिकन सिटी में एक समारोह के दौरान रोमन कैथोलिक चर्च के पोप फ्रांसिस ने मदर टेरेसा को संत की उपाधि दी. दुनियाभर से आए लाखों लोग इस ऐतिहासिक क्षण के गवाह बने थे.

7 मदर टेरेसा ने अपना पूरा जीवन गरीब और असहाय लोगों की भलाई के लिए समर्पित कर दिया था. वह सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि विदेश में भी अपने मानवता के कार्यों के लिए जानी जाती हैं.

8 मदर टेरेसा अपनी मृत्यु तक कोलकाता में ही रहीं और आज भी उनकी संस्था गरीबों के लिए काम कर रही है. उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के साथ भारत रत्न, टेम्पटन प्राइज, ऑर्डर ऑफ मेरिट और पद्म श्री से भी नवाजा गया है. उनका कहना था, ‘जख्म भरने वाले हाथ प्रार्थना करने वाले होंठ से कहीं ज्यादा पवित्र हैं.’

जब मदर टेरेसा से पूछा गया, आप प्रार्थना में ईश्वर से क्या कहती हैं?

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मदर ने जवाब दिया- मैं कुछ नहीं कहती, सिर्फ सुनती हूं। साक्षात्कार करने वाले को कुछ खास समझ नहीं आया कि तो उसने दूसरा सवाल किया- तो फिर आज जब सुनती हैं तो ईश्वर आपसे क्या कहता है?

मदर ने कहा- वह कुछ भी नहीं कहता, वह सिर्फ सुनता है। इसके बाद कुछ देर के लिए दोनों के बीच मौन छा गया। इंटरव्यअर को समझ नहीं आया कि वह अब क्या पूछे? कुद पल तक शांत रहने के बाद मदर ने खुद ही चुप्पी तोड़ी और कहा- क्या आप समझ पाए जो मैं कहना चाहती थी, मुझे माफ कीजिएगा मेरे पास आपको समझाने का कोई दूसरा तरीका नहीं था।

इसके बाद वह खुद की लाखों लोगों के इलाज में तन मन से जुट गईं। मानवता के लिए उनके नेक प्रयासों के लिए उन्हें शांति के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

कहा जाता है कि मदर टेरेसा द्वारा स्थापित मिशनरीज ऑफ चैरिटी की शाखाएं असहाय और अनाथों का घर है। उन्होंने ‘निर्मल हृदय’और ‘निर्मला शिशु भवन’के नाम से आश्रम खोले, जिनमें वे असाध्य बीमारी से पीड़ित रोगियों व गरीबों की स्वयं सेवा करती थीं। मदर टेरेसा का देहावसान 5 सितंबर 1997 को हुआ था, ऐसी मानवता की महान परोकार को हम सभी की ओर से शत् शत् नमन।

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