Rishi Panchami 2018 - wikifeed
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ऋषि पंचमी का व्रत करने से अनजाने हुए पापों के पक्षालन के लिए स्त्री तथा…

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ऋषि पंचमी का व्रत करने से अनजाने हुए पापों के पक्षालन के लिए स्त्री तथा पुरुषों को अवश्य करना चाहिए

ऋषि पंचमी Rishi Panchami 2018 का त्योहार भाद्रपद शुक्ल माह की पंचमी तिथि को मनाया जाता है. इस दिन महिलाएं सप्त ऋषियों की पूजा करती हैं. कहा जाता है ऋषि पंचमी का व्रत सभी वर्ग की स्त्रियों को करना चाहिए. भाद्रपद शुक्ल पंचमी को सप्त ऋषि पूजन व्रत का विधान है. यह व्रत जाने-अनजाने हुए पापों के पक्षालन के लिए स्त्री तथा पुरुषों को अवश्य करना चाहिए. इस दिन गंगा स्नान करने का विशेष माहात्म्य है इस दिन स्नान कर अपने घर के स्वच्छ स्थान पर हल्दी, कुंकुम, रोली आदि से चौकोर मंडल बनाकर उस पर सप्तऋषियों की स्थापना करते हैं.

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ऋषि पंचमी के दिन महिलाएं ऋषियों की पूजा कर उनसे धन-धान्य, समृद्धि, संतान प्राप्ति तथा सुख-शांति की कामना करती हैं.

ऋषि पंचमी व्रत कैसे करें: प्रातः नदी आदि पर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें. तत्पश्चात घर में ही किसी पवित्र स्थान पर पृथ्वी को शुद्ध करके हल्दी से चौकोर मंडल (चौक पूरें) बनाएं. फिर उस पर सप्त ऋषियों की स्थापना करें. इसके बाद गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य आदि से सप्तर्षियों का पूजन करें. तत्पश्चात निम्न मंत्र से अर्घ्य दें-

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कश्यपोऽत्रिर्भरद्वाजो विश्वामित्रोऽथ गौतमः.
जमदग्निर्वसिष्ठश्च सप्तैते ऋषयः स्मृताः॥
दहन्तु पापं मे सर्वं गृह्नणन्त्वर्घ्यं नमो नमः॥

अब व्रत कथा सुनकर आरती कर प्रसाद वितरित करें. तदुपरांत अकृष्ट (बिना बोई हुई) पृथ्वी में पैदा हुए शाकादि का आहार लें. इस प्रकार सात वर्ष तक व्रत करके आठवें वर्ष में सप्त ऋषियों की सोने की सात मूर्तियां बनवाएं. तत्पश्चात कलश स्थापन करके यथाविधि पूजन करें. अंत में सात गोदान तथा सात युग्मक-ब्राह्मण को भोजन करा कर उनका विसर्जन करें.

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ऋषि पंचमी पूजा विधि

घर में साफ-सफाई करके पूरे विधि विधान से सात ऋषियों के साथ देवी अरुंधती की स्थापना करती हैं. सप्त ऋषियों की हल्दी, चंदन, पुष्प अक्षत आदि से पूजा करके उनसे क्षमा याचना कर सप्तऋषियों की पूजा की जाती है. पूरे विधि- विधान से पूजा करने के बाद ऋषि पंचमी व्रत कथा सुना जाता है तथा पंडितों को भोजन करवाकर कर व्रत का उद्यापन किया जाता है.

ऋषि पंचमी व्रत फल

पूरे विधि- विधान से सप्तर्षियों की पूजा करने से व्यक्ति के सभी प्रकार के पाप नष्ट हो जाते हैं. अविवाहित स्त्रियों के लिए यह व्रत बेहद महत्त्वपूर्ण और फलकारी माना जाता है. इस दिन हल से जोते हुए अनाज अर्थात जमीन से उगने वाले अन्न ग्रहण नहीं किए जाते हैं.

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ऋषियों के बनाए गए मार्ग पर चलने का दिन ही ऋषि पंचमी rishi panchami ki kahani

ऋषियों के सिद्धांत को हम जितना अपने जीवन में उतारेंगे, ऋषि पूजन उतना ही सार्थक होगा। मन में छुपे हुए परमात्म खजाने को पाने के लिए ऋषियों का चिंतन-स्मरण करके जीवन में ऋषियों के प्रसाद को भरने का दिन है। ऋषि पंचमी मन में कर्ताभाव नहीं रखते हुए सुख-दु:ख में सम रहते हुए मान-अपमान में सम रहते हुए यह संकल्प करने का दिन है कि हम ऋषियों की तरह कर्मफल को ईश्वर को अर्पण करते रहेंगे।

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अनजाने में हुए पाप कर्मों का प्रभाव दूर करता है यह व्रत rishi panchami vrat katha

भाद्रपद माह में शुक्ल पक्ष पंचमी तिथि को ऋषि पंचमी का व्रत रखा जाता है। ऋषि पंचमी का व्रत कुछ अलग है। यह व्रत महिलाओं और लड़कियों द्वारा किया जाता है। यह व्रत अप्रत्यक्ष या अनजाने में हुए पाप कर्मों को नष्ट करने के लिए महत्वपूर्ण माना गया है।
इस व्रत में किसी देवी-देवता की पूजा नहीं की जाती, बल्कि इस दिन विशेष रूप से सप्त ऋर्षियों का पूजन किया जाता है। महिलाओं की माहवारी के दौरान अनजाने में हुई धार्मिक गलतियों और उससे मिलने वाले दोषों से रक्षा करने के लिए यह व्रत महत्वपूर्ण माना जाता है। समस्त पापों का नाश करने वाला यह व्रत पुण्य फलदायी है। ऋषि पंचमी के दिन सच्चे मन से पूजा करने और उपवास रखने पर दोष-बाधाएं दूर हो जाती हैं।
इस दिन गंगा स्नान का भी महत्व है। इस दिन बिना जुती हुई भूमि से उत्पन्न फल आदि का भोजन करना चाहिए। ऋषि पंचमी को भाई पंचमी नाम से भी जाना जाता है। माहेश्वरी समाज में राखी इसी दिन बांधी जाती है। महिलाएं इस दिन सप्त ऋषि का आशीर्वाद प्राप्त करने और सुख शांति एवं समृद्धि की कामना से यह व्रत रखती हैं।
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